संक्षिप्त परिचय : शंकर देव तिवारी जी की यह कविता भय के एहसास के इर्द गिर्द घूमते कुछ प्रश्न पूछती है।
शब्द मंथन 1
नींद आएगी तो क्यों
किया कुछ नहीं क्यों
अब सहायता ही क्यों
एकला फल मिले क्यों
वो सभी पूछ ताछ में शामिल
जन्म मृत्यु पर ही सवाल क्यों
अकारण भय का एहसास हो
तब अब कब का उत्तर क्यों
कर्म बन फल का आयाम संग
एकाग्रता का हो जाना भंग
अच्छे बुरे का अद्भत संगम
है दोस्त दुश्मन का आचरण भंग
राम श्याम पर दाव
देखते ही देखते भाव
बदल गए हैं दांव
अच्छे बुरे सभी भाव
लाल लाल देख भाल
मन हर्षाय होत भोर
शाम की कहें भी क्या
दिल मांगे मोर मोर
शब्द लिखे बन जाये आखर
मिलकर बन जाता है वाक्य
पढ़ो लिखो बन जाओ नेक
वाणी मधुर लिख बन वाक्य
शंकर देव तिवारी
कैसी लगी आपको यह एहसास पर कविता , “भय का एहसास”? कॉमेंट कर के ज़रूर बताएँ और कवि को भी प्रोत्साहित करें।
शंकर देव तिवारी जी के बारे में और जानने के लिए पढ़ें यहाँ ।
पढ़िए उनकी और कविताएँ यहाँ:
आजकल का शौक | कविता हिन्दी में: क्या है आजकल का शौक़? क्यों कोई ऐसा है जिससे पूछ पाना की वो कैसे हैं मुश्किल है? पढ़िए शंकर देव तिवारी जी की हिन्दी में कविता “आजकल का शौक़”।
72 साल | शंकर देव तिवारी | गणतंत्र दिवस पर कविता
पढ़िए एहसास पर अन्य कविताएँ :-
- अपनेपन का अहसास: अपनेपन का अहसास जताती – एक घर की समय के साथ बदलती कहानी बयाँ करती है उषा रानी जी की यह कविता।
- जवाब देने की कोशिश कर रहे हैं कवि अपनी कविता ‘दिल कागज पर लिख लाया है’ के माध्यम से।
- इतना कैसे कर लेते हो : योगेश नारायण दीक्षित जी की जीवन पर यह कविता, जीवन के कुछ अजीब तथ्यों को सरलता से प्रस्तुत करती है।
- हाँ मैं पागल हूँ: अनिल कुमार मारवाल की यह हिन्दी की कविता भारतीय समाज को जकड़े हुए कई मुद्दों पर प्रकाश डालती है।
अगर आप भी कहानियाँ या कविताएँ लिखते हैं और बतौर लेखक आगे बढ़ना चाहते हैं तो हमसे ज़रूर सम्पर्क करें storiesdilse@gmail.com पर। आप हमें अपनी रचनाएँ यहाँ भी भेज सकते हैं: https://storiesdilse.in/submit-your-stories-poems/
Photo by Larm Rmah
![]()