संक्षिप्त परिचय : नवरात्रि के अवसर पर बहुत ही पावन, बिलकुल नि:स्वार्थ – यह कविता नहीं, एक प्रार्थना है। चलिए आप और मैं, हम सब मिल कर आज माँ से यही प्रार्थना करें।
माँ कल्याणी, माँ भवानी,
आओ घर मेरे, कृपा बरसाओ ।
दूर करो सब कष्ट हमारे,
बुराइयों का नाश करो माँ ।
नारी जीवन को सुरक्षित करो,
अत्याचारियों का नाश करो,
कन्याओं को दुराचारियों से
बचाओ माँ, रक्षा करो माँ ।
नौ दिन ही नहीं, हर दिन
तेरी पूजा- अर्चना करें माँ,
सबको सद्बुद्धि सदाचार दो,
धरती का हाहाकार मिटा दो,
सुख-शांति का संचार हो ।
भक्ति का फल बस इतना दो,
कोई दुखी ना लाचार हो माँ,
सुखमय सारा संसार हो माँ ।
सुखमय सारा जहाँ हो माँ ।।
स्वरचित कविता
उषा रानी पुंगलिया जोधपुर
राजस्थान
कैसी लगी आपको नवरात्रि पर कविता , “सुखमय सारा संसार हो’’, ? कॉमेंट कर के ज़रूर बताएँ और कवयित्री को भी प्रोत्साहित करें।
कविता की लेखिका उषा रानी के बारे में जानने के लिए पढ़ें यहाँ ।
पढ़िए उनकी और कविताएँ:
- प्रकृति
हमारी माता है: है तो मनुष्य भी प्रकृति का अंश ही, पर आज कुछ ऐसी स्थिति हो गयी है कि वही मनुष्य प्रकृति का दुश्मन लगता है। ऐसे में ज़रूरी है कि सब समझें प्रकृति का महत्व। यही पहलू उठाती है कवयित्रि उषा रानी की प्रकृति पर यह कविता ।
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पढ़िए नवरात्रि के पावन अबसर पर ऐसी और कविताएँ यहाँ :-
- गणपति बप्पा मोरिया: गणेश चतुर्थी के अवसर पर गणपति जी की वंदना करती है यह सुंदर कविता।
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Photo by Sonika Agarwal
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जय माता दी !!!
बहुत सुंदर रचना…..