संक्षिप्त परिचय : शहीद दिवस पर विशेष श्रध्दांजलि अर्पित करते हुए यह कविता वीर शहीदों को नमन है।
वीर शहीदों की याद कभी
भूला नहीं पायेंगे ।
आजादी की बलिवेदी पर
जिन नौजवानों ने
अपने प्राणों की बलि चढाये।
एक नहीं हजारों माँओं ने
खून के आंसू बहाये
वो छोटी उम्र के भगतसिंह हो
या राजगुरु या सुखदेव
हंसते हंसते फांसी पर लटकते हुए भी”भारत माता” की जयकारे
लगाते लगाते अपने प्राणों की
बलि चढाये।
उनकी यादें देश भक्ति की
अलख जगाने और
दुश्मनों के छक्के छुड़ाने का
जज्बा पैदा करते।
लेकिन मित्रों!
दुख तब होता है
जब आजादी का दामन
हमारे ही देश के नादान
दागदार करते।
वीरों के बलिदान को नापाक इरादों से तार तार करते हैं।
बड़ा ही अफसोस होता है
जब मान ईमान की बातें करते
लेकिन रिश्वतखोरी का नशा फैलाते।
खुद ही खुद के पांवों पर कुल्हाड़ी
मारते,
देश की छवि को धूमिल करते।
आज शहीद दिवस पर हम
संकल्प लें कि वीर जवानों के
बलिदान को कभी रुसवा नहीं
होने देंगे।
वन्देमातरम्! वन्देमातरम्!
जयहिंद! जयभारत! को
विश्व के आकाश में सूर्य की
प्रखर रोशनी बना कर चमकायेंगे.
स्वरचित कविता
उषा रानी पुंगलिया जोधपुर राजस्थान.
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